भारत अब टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर चीन को सीधी चुनौती देने की तैयारी में है. देश में ऐसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जा रहा है जिसमें न डाटा विदेश जाएगा और न ही साइबर फ्रॉड या डाटा ब्रीच का खतरा रहेगा. यह मिशन स्टार्टअप्स से लेकर बड़ी कंपनियों तक को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाएगा. ताइवान से भारत लौटे आईआईटियन अभिषेक सक्सेना के इस प्लेटफॉर्म को डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत विजन से जोड़कर देखा जा रहा है.

नई दिल्ली. भारत अब टेक्नोलॉजी के दम पर चीन की बढ़त को चुनौती देने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है. सरकार और प्राइवेट सेक्टर मिलकर देश में ही ऐसा मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, जिससे भारतीय कंपनियों का डाटा पूरी तरह देश के भीतर सुरक्षित रह सके. मकसद साफ है, विदेशी सर्वर और सॉफ्टवेयर पर निर्भरता खत्म करना और भारत को डिजिटल पावरहाउस बनाना.
इस डिजिटल मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें साइबर फ्रॉड और डाटा ब्रीच जैसी समस्याओं को लगभग खत्म करने का दावा किया जा रहा है. स्टार्टअप्स, मेक इन इंडिया कंपनियां और बड़े कारोबारी समूह अब अपने संवेदनशील डाटा को बिना डर के भारत में ही स्टोर कर सकेंगे. इससे न सिर्फ भरोसा बढ़ेगा, बल्कि देश की डिजिटल संप्रभुता भी मजबूत होगी.