अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए गंदा काम करने की बात स्वीकार करने वाले पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अब कहा है कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर की तरह से इस्तेमाल करके फेंक दिया. आखिर ये कौन सा गंदा काम है, जिसे करने के बाद पाकिस्तान को महज एक टॉयलेट पेपर की तरह रद्दी में डाल दिया गया? ख्वाजा आसिफ के इस बयान के मायने क्या है?

पाकिस्तान इस समय अपने बुरे दौर से गुजर रहा है. भारत के पड़ोसी मुल्क की पहचान खराब अंदरूनी हाल वाले देश की रही है. यही हाल बाहरी तौर पर यानी वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर भी है. उसकी हालत टॉयलेट में इस्तेमाल होने वाले पेपर के जैसी हो गई है. यह बात किसी और ने नहीं बल्कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कही है. अभी पिछले साल ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए गंदा काम करने की बात स्वीकार करने वाले आसिफ ने अब कहा है कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर की तरह से इस्तेमाल करके फेंक दिया. आखिर ये कौन सा गंदा काम है, जिसे करने के बाद पाकिस्तान को महज एक टॉयलेट पेपर की तरह रद्दी में डाल दिया गया? ख्वाजा आसिफ के इस बयान के मायने क्या है? आइए समझते हैं हर एक बात.
पाकिस्तान की नैशनल असेंबली में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने साफ शब्दों में अमेरिका पर यूज किए जाने का आरोप लगाया. आसिफ ने संसद में खड़े होकर कहा कि पाकिस्तान ने अपनी पॉलिसी में सुपरपावर को खुश करने के लिए बदलाव किए और उसने टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया. ख्वाजा ने इसके लिए पड़ोसी देश अफगानिस्तान का हवाला दिया, जहां कई सालों तक अमेरिका और रूस ने वर्चस्व कायम रखने की लड़ाई लड़ी.
दरअसल ख्वाजा आसिफ अफगानिस्तान की धरती पर आधुनिक इतिहास में हुए दो जंगों का हवाला देते है. इसमें पहला तो सोवियत-अफगान युद्ध है जो साल 1979 से लेकर 1989 तक चला. ख्वाजा के अनुसार अमेरिका ने पाकिस्तान को यहां पर अपना जरिया बनाया. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने अमेरिका से मिले अरबों डॉलर की रकम को अफगान विद्रोहियों तक पहुंचाया. इसके साथ ही पाकिस्तान की जमीन पर ट्रेनिंग कैंप में लाखों की तादाद में लड़ाकों को ट्रेनिंग दी गई. पाकिस्तान ने उस दौर में 32 लाख से अधिक अफगान शरणार्थियों को जगह दी.
उनका दूसरा उदाहरण 2001 से लेकर 2021 तक अफगानिस्तान में अमेरिका की जंग से जुड़ा है. पाकिस्तान का रोल यहां पर सप्लाई चैनल के तौर पर रहा. नाटो सेनाओं का 80 प्रतिशत सामान कराची पोर्ट के जरिए ही अफगानिस्तान तक पहुंचता था. पाकिस्तान एक तरफ तो अमेरिका का साथी बना रहा, वहीं दूसरी तरफ उस पर तालिबान की मदद करने के आरोप भी लगे, जिससे अफगानिस्तान में भारत का प्रभाव कम किया जा सके.
अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की विदाई हो चुकी है. यहां 2021 में तालिबान का शासन आने के बाद से रिश्ते और भी बिगड़ गए हैं. अब ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) जैसे संगठन, पाकिस्तान पर ही हमले कर रहे हैं. कुछ महीने पहले तो हालात यहां तक हो गए कि अक्टूबर 2025 में तो पाकिस्तान को अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक तक करनी पड़ी. पाकिस्तान इस समय अंदर ही अंदर बलूच विद्रोहियों से भी जूझ रहा है.
पाक रक्षा मंत्री ने और क्या-क्या कहा?
ख्वाजा आसिफ ने कहा- ‘अफगानिस्तान की धरती पर लड़ी गई दो जंगों में हम लोग शरीक हुए. सोवियत यूनियन (रूस) जब अफगानिस्तान आया तो काबुल की हुकूमत की इनविटेशन पर आए थे. रूस वहां पर कोई आक्रमण करने नहीं आया था. ये आक्रमण की थिअरी अमेरिकियों की बुनी हुई है. हमने उन जंग में इस्लाम के लिए या मजहब की मोहब्बत के लिए शिरकत नहीं की थी. केवल सुपरपॉवर का साथ पाने के लिए हमने लड़ाई लड़ी. वो कोई जेहाद नहीं था.
उन्होंने आगे भड़ास का इजहार करते हुए कहा- ‘इसके लिए शैक्षिक और धार्मिक बदलाव किया. इन युद्धों को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान के एजुकेशन सिस्टम को भी बदल दिया गया था. बच्चों को जो पढ़ाया गया, उसमें कट्टरपंथ के बीज बोए गए, जिसका असर आज भी देश की स्थिति पर दिख रहा है. हमने मेड इन अमेरिका वाला जेहाद किया. हमने कोई सबक सीखा नहीं है. केके अजीज की एक किताब है- द मर्डर ऑफ हिस्ट्री. हमने पूरे इतिहास को बदला और वो भी केवल उस जेहाद में फिट बैठने के लिए. उसके बाद अमेरिका ने हमें अकेला छोड़ दिया लेकिन हमें अक्ल फिर भी नहीं आई.’
रक्षा मंत्री ने आगे आरोप लगाते हुए कहा- ‘9/11 किसने कराया, ये आज तक पता नहीं चला? हम अमेरिकियों की उस लड़ाई में भी दो दशक तक किराये के लिए उपलब्ध हो गए. हमने रेंटेड वॉर लड़ी. जनरल परवेज मुशर्रफ को केवल अमेरिकी बैसाखी चाहिए थी. आज हम कारण ढूंढते हैं कि आखिर हमारे देश में दहशतगर्दी क्यों हो रही है. इस मुल्क की 97-98 प्रतिशत आबादी मुसलमान है. फिरके अलग हो सकते हैं.’
हिलेरी क्लिंटन का बयान है कि उन्होंने किस तरह से पाकिस्तान को इस्तेमाल किया. हमें टिश्यू पेपर भी नहीं, बल्कि टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया और छोड़ गए. आज से 30-40 साल पहले पाकिस्तान एक अच्छा मुल्क था. सब लोग मिल-जुलकर रहते थे और कभी किसी की मिट्टी के प्रति मोहब्बत पर सवालिया निशान नहीं लगाते थे
पिछले साल भी ‘डर्टी वर्क’ वाली बात
इससे पहले पिछले साल मई 2025 में स्काई न्यूज की याल्दा हकीम के साथ इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम करीब 3 दशक से अमेरिका और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों के लिए यह Dirty Work (गंदा काम) कर रहे हैं. यह एक गलती थी और हमें इसकी कीमत चुकानी पड़ी, इसीलिए आप मुझसे यह कह रही हैं. अगर हम सोवियत संघ के खिलाफ जंग में और 9/11 के बाद की जंग में शामिल नहीं होते, तो पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग होता.’
शहीदों की इज्जत नहीं करता है पाक!
ख्वाजा आसिफ ने इसके साथ ही पाकिस्तानी सेना और सरकार को लेकर एक और चौंकाने वाला बयान दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अंदर राष्ट्रीयता की कोई भावना ही नहीं बची है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में लड़ाई में मारे गए सैनिकों को सम्मान तक नहीं मिलता. पाकिस्तान इस तरह अंदर से बंटा है कि नेता अपने फायदे के लिए शहीदों के जनाजे में नहीं जाते. आसिफ ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में चरमपंथी हिंसा पर इशारा करते हुए कहा कि पाकिस्तान के अंदर अलग-अलग गुट आपस में लड़ रहे है !