बजट पर उठ रहे सवालों का दिया जवाब, बोलीं- 2050 तक को ध्यान में रखकर बनाया गया

निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बुधवार को बजट से संबंधित सवालों के जवाब दिए. उन्होंने बताया कि यह बजट लॉन्ग टर्म ग्रोथ को ध्यान में रखकर बनाया गया है. बकौल निर्मला सीतारमण केंद्र जो आज कर रहा है इसका असर दूरगामी होगा.

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में बजट से संबंधित सवालों के जवाब दिए. उन्होंने कहा कि यह बजट 2026 से 2050 तक को ध्यान में रखकर बनाया गया है. बकौल वित्त मंत्री बजट को लेकर कई लोगों के मन में संदेह है जिसे दूर किया जाएगा. उन्होंने कहा, “यह 21वीं सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है. यही कारण है कि यह उन दीर्घकालिक निवेशों पर केंद्रित है जो हम आज कर रहे हैं और जिनका भविष्य में दूरगामी प्रभाव पड़ेगा.”

बकौल वित्त मंत्री, “बजट में श्रम-प्रधान क्षेत्रों (labour-intensive sectors) पर विशेष जोर दिया गया है ताकि उनके पास सुधार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकें. इसके साथ ही, यह उन पारंपरिक उद्योगों (legacy industries) पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है जो पुनरुद्धार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनके लिए फंड की व्यवस्था की गई है.”

रोजगार और उद्यमिता को लेकर क्या बोलीं वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने कहा,

हम राज्य सरकारों का स्वागत करते हैं कि वे मेगा फूड पार्क, आईटी पार्क, स्मार्ट सिटी और जलमार्ग आदि स्थापित करने में सहायता के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करें.

कोई भी राज्य पीएम गति शक्ति के मानकों को पूरा करते हुए केंद्र के पास आ सकता है, बशर्ते उनके पास एक व्यावहारिक प्रस्ताव (viable proposition) हो. कोई भी राज्य ‘संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा हब’ (Allied and Health Services hubs) स्थापित करने का अनुरोध कर सकता है, जहां हम चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का इरादा रखते हैं. राज्य इस पहल का हिस्सा बनने की मांग कर सकते हैं, जिसके तहत चिकित्सा शिक्षा और मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों के सभी पहलुओं को एक ही क्षेत्र में केंद्रित किया जा सकता है. इसलिए कोई भी राज्य इसके लिए पात्र हो सकता है. भारत के पास चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) का जो लाभ है, उसे देखते हुए यह एक बड़ा और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रस्ताव है. यह बहुउद्देश्यीय, बहु-विशिष्ट संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनेगा, जिसके माध्यम से हम चिकित्सा पर्यटन को और बढ़ावा दे सकेंगे.

हमने कहा है कि शिक्षा पूरी करने के बाद कौशल (Skills) सीखने के लिए जगह तलाशने के बजाय, कौशल विकास के तत्व को शिक्षा में ही शामिल किया जा सकता है. इससे पढ़ाई खत्म होने पर छात्र यह कह सकेंगे कि मैं उद्यमी बन सकता हूँ. इस तरह के मेगा सेंटर किसी भी राज्य के औद्योगिक क्लस्टर के पास स्थापित किए जा सकते हैं. अतः शिक्षा हब के रूप में ये मेगा उद्यमिता निर्माण केंद्र (Mega entrepreneurship building centres) किसी भी राज्य में आ सकते हैं. हम राज्यों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं ताकि उच्च शिक्षा के इन विशाल केंद्रों को बढ़ावा दिया जा सके और छात्र वहां से उद्यमी बनकर निकलें.

राज्यों को कितना पैसा दिया गया

वित्त मंत्री ने कहा,  “वर्ष 2026-27 में राज्यों को हस्तांतरित किए जाने वाले कुल संसाधन की वैल्यू अनुमानित रूप से 25.44 लाख करोड़ रुपये है. इसमें टैक्स में राज्यों की हिस्सेदारी और केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत जारी की जाने वाली राशि शामिल है.” उन्होंने कहा, “राज्य दोनों तरह की बातें नहीं कर सकते. राज्यों को यह जांचना चाहिए कि क्या विभाज्य पूल (divisible pool) का पूरा शुद्ध राजस्व-अर्थात सकल कर राजस्व से उपकर (cess) और अधिभार (surcharge) को हटाकर, उन्हें प्राप्त हो रहा है या नहीं. सकल कर राजस्व (gross tax revenue) पर चर्चा करने की कोई आवश्यकता नहीं है. केंद्र सरकार उपकर और अधिभार लागू करती है जो संविधान के अनुरूप है. उपकर एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए एकत्र किया जाता है.”

उन्होंने कहा, “सरकार ने पिछले बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की परिभाषा का विस्तार किया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कंपनियां एक निश्चित टर्नओवर की सीमा पार करने के बाद अपने लाभ न खो दें… वर्तमान बजट में, निर्यात क्षमता वाले मध्यम स्तर के उद्योगों को समर्थन देने और उन्हें अपने क्षेत्र के चैंपियन के रूप में उभरने में मदद करने के लिए और अधिक उपायों की घोषणा की गई है.” उन्होंने कहा, “200 पारंपरिक क्लस्टर (legacy clusters), जो दशकों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के आधार के रूप में जाने जाते हैं और उत्पादन व निर्यात करते हैं चाहे वह लुधियाना, जालंधर या कानपुर हो, या बिहार के पास के केंद्र हों या बंगाल में कहीं भी हमने स्वेच्छा से प्रस्ताव दिया है कि उन्हें फंड दिया जा सकता है, उन्हें अपग्रेड किया जा सकता है और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा सकते हैं.”

डेट टू जीडीपी

कर्ज-जीडीपी अनुपात (debt-to-GDP) कोई नया लक्ष्य नहीं है. राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) के साथ, कर्ज-जीडीपी अनुपात पहले से ही एफआरबीएम (FRBM) अधिनियम के 2018 के संशोधन में एक लक्ष्य के रूप में शामिल है. इसका उल्लेख एफआरबीएम अधिनियम की धारा 4(1) बी के तहत किया गया है.

बजट में फंड आवंटन की बात

बजट में कुछ राज्यों को फंड न मिलने के दावों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि 2018-19 और 2020 से 2023 के बीच इस संवैधानिक संस्था की सभी सिफारिशों को पूरी तरह माना गया है.

16वें वित्त आयोग ने 2018-19 से 2022-23 तक केंद्र द्वारा राज्यों को दिए गए पैसों की जांच की और इस नतीजे पर पहुंचा कि इन सभी सालों में केंद्र ने उतना ही पैसा दिया है जितना वित्त आयोग ने कहा था. इसलिए, यह सिर्फ हमारा दावा नहीं है. खुद वित्त आयोग ने विस्तार से अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 2018-19 से 2022-23 के दौरान केंद्र से राज्यों को जितना पैसा जाना चाहिए था, वह पूरी तरह दिया गया है. राज्यों के लिए इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है.

कितना आएगा, कितना जाएगा?

वित्त मंत्री ने कहा है, “बजट अनुमानों में कुल कर प्राप्तियां (Gross tax receipts) 44.04 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से लगभग 8% अधिक है. यह 3.26 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को दर्शाता है. वर्ष 2026-27 के लिए कुल खर्च 53.47 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि पूंजीगत व्यय (Capital expenditure) 12.22 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है जो जीडीपी का 3.1% है और 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 11.5% अधिक है.”

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