अमेरिकी टैरिफ की वजह से जिस वक्त पूरी दुनिया ट्रंप को निशाने पर ले रही है, ठीक उसी वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति को बहुत बड़ी खुशखबरी मिली है. अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट का आंकड़ा बताता है कि कंपनियों ने 1.3 लाख नए लोगों को नौकरी पर रखा है. यह अमेरिकियों के लिए भी चौंकाने वाला है.

पूरी दुनिया की नजरें इस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक ट्रेड पॉलिसी और टैरिफ युद्ध पर टिकी हैं, लेकिन इसी बीच अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट की ताजा रिपोर्ट ने वॉशिंगटन से लेकर न्यूयॉर्क तक सबको हैरान कर दिया है. बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने में अमेरिकी कंपनियों ने 1,30,000 नए लोगों को नौकरी दी है. यह उम्मीद से कहीं ज्यादा है. जहां अर्थशास्त्री केवल 75,000 नौकरियों का अनुमान लगा रहे थे, वहां इस जबरदस्त आंकड़े ने ट्रंप प्रशासन को खुश कर दिया है. लेकिन इस ‘खुशखबरी’ के पीछे एक ऐसा कड़वा सच भी छिपा है जिसने अमेरिकी विशेषज्ञों और आम जनता को चिंता में डाल दिया है.
भले ही पिछले महीने का आंकड़ा मजबूत दिख रहा हो, लेकिन इसी रिपोर्ट में सरकार ने पिछले दो सालों (2024-2025) के आंकड़ों में जो संशोधन किए हैं, वे डराने वाले हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल यानी 2025 में जितनी नौकरियां पैदा होने का दावा किया गया था, उनमें से लाखों नौकरियां अब ‘कागजों’ से गायब हो गई हैं. साल 2025 में कुल नौकरियों का आंकड़ा घटकर मात्र 1,81,000 रह गया है. यह 2020 के महामारी काल के बाद का सबसे खराब प्रदर्शन है. इससे पहले रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 5,84,000 नौकरियां पैदा हुईं, यानी आधे से ज्यादा नौकरियां संशोधन में कट गईं
हैरानी की बात यह है कि जहां नई भर्तियों की रफ्तार सुस्त है, वहीं बेरोजगारी दर गिरकर 4.3% पर आ गई है. अर्थशास्त्री इसके पीछे ट्रंप की कड़क इमिग्रेशन पॉलिसी को एक बड़ी वजह मान रहे हैं. विदेशों से आने वाले लोगों की संख्या घटने के कारण नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा कम हुई है. डलास फेडरल रिजर्व के अनुसार, अब बेरोजगारी दर को स्थिर रखने के लिए महीने में केवल 20,000 से 30,000 नई नौकरियों की जरूरत है, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 2.5 लाख था.
मस्क की छंटनी और ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी का ‘डर’
अमेरिकी मार्केट में नौकरियां तो पैदा हो रही हैं, लेकिन बिजनेस जगत अभी भी ‘डरा’ हुआ है. इसकी तीन बड़ी वजहें सामने आई हैं. पिछले साल अरबपति एलन मस्क द्वारा सरकारी कार्यबल में की गई भारी छंटनी का असर अब भी बाजार पर महसूस किया जा रहा है.राष्ट्रपति ट्रंप की अनिश्चित ट्रेड नीतियों के कारण कंपनियां नया निवेश करने और लोगों को काम पर रखने से कतरा रही हैं. ऊंची ब्याज दरों का बोझ अब भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है.