लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं, कांग्रेस ने बताई वजह

प्रस्ताव में कहा गया कि 2 फरवरी को राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना संबोधन पूरा नहीं करने दिया गया. 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को बजट सेशन के बाकी समय के लिए मनमाने ढंग से सस्पेंड कर दिया गया.

नई दिल्ली:

संसद के बजट सत्र में आए दिन हंगामा देखने को मिल रहा है. इसी बीच, अब मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विपक्ष ने स्पीकर पर सदन के कामकाज में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है. विपक्ष के सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लोकसभा महासचिव को रूल 94(सी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है. इस नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. हालांकि इस पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं.

हालांकि लोकसभा स्पीकर के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर राहुल गांधी द्वारा हस्ताक्षर नहीं करने को लेकर कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि नेता विपक्ष की मर्यादा के मद्देनजर ऐसा किया गया है. इससे पहले जब राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, तब राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किए थे.

यह प्रस्ताव लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने पेश किया है, जिसमें संविधान के आर्टिकल 94(सी) का इस्तेमाल करते हुए स्पीकर को हटाने का प्रावधान है. नोटिस में विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही खुलेआम पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाने और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने का मौका न देने का आरोप लगाया.

स्पीकर पर राहुल गांधी को अपना संबोधन पूरा नहीं करने देने का आरोप

अपने आरोप को साबित करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव में कई उदाहरणों का हवाला दिया गया. इसमें कहा गया कि 2 फरवरी को राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना संबोधन पूरा नहीं करने दिया गया. 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को बजट सेशन के बाकी समय के लिए मनमाने ढंग से सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बारे में नोटिस में दावा किया गया कि यह सदस्यों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए सजा देने जैसा है.

पत्र में विपक्ष ने 4 फरवरी की एक घटना का भी जिक्र किया, जब विपक्षी सदस्यों के बार-बार कहने के बावजूद, एक भाजपा सांसद को कथित तौर पर चेयर से बिना किसी डांट के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर पूरी तरह से आपत्तिजनक और निजी हमले करने की इजाजत दी गई थी और संबंधित सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.

वहीं, स्पीकर ओम बिरला द्वारा 5 फरवरी को मोशन ऑफ थैंक्स को वॉयस वोट से पास करने के बाद की गई बातों पर भी आपत्ति जताई गई. सदन में अपने बयान में बिरला ने विपक्षी सदस्यों पर पहले कभी नहीं हुए सीन बनाने का आरोप लगाया था और कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री से एक संभावित अप्रिय घटना को टालने के लिए सदन में न आने का अनुरोध किया था.

विपक्ष के अनुसार, इन बातों में कांग्रेस सांसदों के खिलाफ साफ तौर पर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं. नोटिस में कहा गया कि स्पीकर, जिन्हें प्रोसीजर के नियमों और पार्लियामेंट्री डेकोरम का कस्टोडियन होना जरूरी है, ने ऐसे बयान देने के लिए हाउस फ्लोर को चुना, जो इस संवैधानिक संस्था का गलत इस्तेमाल है.

विपक्ष ने कहा कि हालांकि वह स्पीकर का पर्सनली सम्मान करता है, लेकिन उसे इस बात से दुख और तकलीफ है कि विपक्षी सांसदों को लोकसभा में लोगों की चिंता के जायज मुद्दे उठाने से लगातार रोका जा रहा है.

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