चुनावी उलटफेर का समीकरणएमबीएमसी चुनाव: पैनल नंबर 9 बना बहुकोणीय मुकाबले का केंद्र!

मीरा–भायंदर | -Open Air Times

मीरा–भायंदर महानगरपालिका (MBMC) चुनावों की घोषणा के साथ ही शहर में राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। सबसे अधिक चर्चित क्षेत्रों में शामिल पैनल नंबर 9, जो कभी कांग्रेस का मज़बूत गढ़ माना जाता था, अब एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी और बहुकोणीय चुनावी रणभूमि में तब्दील हो चुका है।
पैनल नंबर 9 में गीता नगर (फेज़ 1 से 6), सर्वोदय नगर, लोढ़ा कॉम्प्लेक्स, बैक रोड के कुछ हिस्से, संघवी एम्पायर और पुराने पेट्रोल पंप क्षेत्र शामिल हैं। यह क्षेत्र सामाजिक रूप से मिश्रित मतदाता संरचना वाला है, जहां उच्च और निम्न मध्यम वर्ग के मतदाताओं की संख्या निर्णायक मानी जा रही है।
वार्ड प्रोफाइल एवं जनसांख्यिकी (पैनल नंबर 9)
कुल जनसंख्या: 32,600
अनुसूचित जाति (SC): 219
अनुसूचित जनजाति (ST): 170
कुल नगरसेवक: 4
एमबीएमसी के गठन वर्ष 2002 के बाद से यह वार्ड लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहा। 2017 के नगर निगम चुनावों में कांग्रेस ने चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि चौथी सीट कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार अमजद शेख के खाते में गई थी।
हालांकि, बीते कुछ वर्षों में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व कांग्रेस नगरसेवक नरेश पाटिल और अमजद शेख पहले भाजपा में शामिल हुए और अब अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का हिस्सा बन चुके हैं। उनकी संभावित उम्मीदवारी से महायुति की स्थिति इस पैनल में मजबूत होती दिख रही है, जिससे चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया है।
कांग्रेस की ओर से एडवोकेट सना देशमुख के नाम पर विचार किया जा रहा है, जो अविभाजित एनसीपी और शरद पवार गुट में अल्पकालिक कार्यकाल के बाद पुनः कांग्रेस में लौटी हैं। इसके अलावा पार्टी प्रवक्ता जय सिंह ठाकुर और फारूक हुसैन भी दावेदारी की दौड़ में हैं, जिससे कांग्रेस के भीतर आंतरिक प्रतिस्पर्धा उभरकर सामने आई है।
महायुति के अंतर्गत भाजपा भी अपनी रणनीति की पुनर्समीक्षा कर रही है। आशीष लोढ़ा और डॉ. सुरेश येओले को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। वहीं, गठबंधन सहयोगियों को संतुलित करने के उद्देश्य से भाजपा द्वारा पैनल नंबर 9 में पीछे हटने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना जमीनी स्तर पर मज़बूत पकड़ रखने वाले सलमान हाशमी को मैदान में उतार सकती है। वहीं, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) भी अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए तैयार है। पार्टी के मीरा–भायंदर कार्यकारी अध्यक्ष गुलाम नबी फारूकी द्वारा नामांकन फॉर्म लिए जाने से धर्मनिरपेक्ष और अल्पसंख्यक मतों में विभाजन की आशंका बढ़ गई है।
इसके अलावा AIMIM, वंचित बहुजन आघाड़ी और आम आदमी पार्टी जैसी छोटी पार्टियां भी इस पैनल से चुनाव लड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं, जिससे मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।
निष्कर्ष
कभी कांग्रेस का अभेद्य किला रहा पैनल नंबर 9 अब चुनावी उलटफेर के समीकरण का प्रतीक बन चुका है। बदलते गठबंधन, संभावित दल-बदल और बहुकोणीय मुकाबले के बीच यह पैनल इस बात का संकेत दे रहा है कि आने वाले एमबीएमसी चुनावों में वोटों का ध्रुवीकरण, गठबंधन की मजबूती और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता ही जीत-हार का फैसला करेगी।

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